
मंडी। सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों पर हाईकोर्ट का रुख कड़ा हो गया है। अवैध कब्जाधारकों को न केवल कब्जे हटाने का खर्च नप को देना होगा, बल्कि सरकारी भूमि पर जितने साल कब्जा कर रखा है, उसकी मार्केट वेल्यू के आधार पर हर्जाना भी देना होगा। इधर, नगर परिषद ने सरकारी भूमि पर कब्जा करने वालों के बिजली और पानी के मीटर काटने के बारे में विद्युत बोर्ड और आईपीएच महकमे को पत्र लिख दिया है। दोनों विभागों की ओर से बिजली और पानी के कनेक्शन काटने के बारे में नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। शीघ्र ही अवैध कब्जों से बिजली और पानी के कनेक्शन काटे जाएंगे। बुधवार को उच्च न्यायालय ने नगर परिषद को निर्देश दिए हैं कि 15 दिन के अंदर सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे हटाकर की गई कार्रवाई के बारे में रिपोर्ट पेश की जाए।
वीरवार को नगर परिषद की जेल रोड में अवैध कब्जे हटाने की प्रक्रिया जारी रही। नप के कर्मचारियों ने श्याम लाल के कब्जे पर हथौड़ा चलाकर ध्वस्त किया। इस दौरान मकान का ऊपरी हिस्सा स्थानीय निवासी संतोष कुमारी की छत के साथ टकरा कर नीचे गिर गया। जिससे बिजली की एयर बंच केबल टूटने से स्पार्किंग होने लगी। बिजली बोर्ड के कर्मचारियों को मौका पर पहुंच कर बिजली की आपूर्ति काटनी पड़ी। नप के अवैध कब्जे हटाने के तरीके पर लोग सवाल उठाने लगे हैं। लोगों का कहना है कि जैसे ही नप का हथौड़ा अवैध कब्जे हटाने के लिए चलता है तो साथ लगते घरों में कंपन से दरारें आने और मलबा गिरने का अंदेशा रहता है। इधर, आईपीएच के अधिशासी अभियंता अरुण शर्मा का कहना है कि नगर परिषद की ओर से मिले पत्र पर कार्रवाई शुरू करते हुए अवैध कब्जाधारकों को नोटिस जारी कर दिए हैं। वहीं, नप अध्यक्ष सुशीला सोंखला का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेशों की अनुपालना करते हुए सरकारी भूमि से अवैध कब्जे हटाने की प्रक्रिया जारी रखी जाएगी।
